Description
पुस्तक परिचय प्रस्तुत पुस्तककी लेखिका का यह प्रथम काव्य संग्रह है जिसमें उनकी 60 कविताएं संकलित हैं। कवि अपनेभाव-विचारों की अभिव्यक्ति कविता के माध्यम से करता है। इस अभिव्यक्तिकरण में प्रयुक्तहोने वाले शब्द कभी उसके मन को आह्लादित करते हैं तो कभी समाज की स्थिति के प्रति सोचनेके लिए बाध्य करते हैं। कवि के लिए कविता लिखने का उद्देश्य अपने भावों को समाज केसाथ तादात्म्यीकरण करने में ही होता है। स्वयं लेखिका के शब्दों में उनका ऐसा माननाहै कि, “मूलतः मैं कवियित्री नहीं हूं। पर समाज में घटने वाली घटनाओं को देख मनतड़प उठता है और भावों का प्रवाह शब्दों में अपने-आप ही ढल कर कविता का रूप स्वतः बनतागया। “प्रस्तुत संग्रह की इन कविताओं में मैंने कई प्रसंगों जैसे स्त्री की दशा,राजनीतिक कुतंत्रों, युवा वर्ग की कर्मण्यता, तथा आतंकवाद, आदि पर अपने विचारों कोप्रस्तुत करने का प्रयास किया है।” विश्वास है पाठकों को ये कविताएं अवश्य हीप्रभावित करेंगी और वे इस संग्रह का स्वागत करेंगे। लेखक परिचय नाम: के. माधवीजन्म 28 फरवरी, हैदराबाद में पिता श्री के. शंकर राव शिक्षा: एम. ए., एम.फिल, पी-एच.डी,पी.जी.डी.टी. (उस्मानिया विश्व विद्यालय, हैद्राबाद) पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयोंपर अनेक लेख प्रकाशित एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों में तथा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीयसंगोष्ठियों में प्रपत्र वाचन प्रकाशित पुस्तकें : वस्तुनिष्ठ हिंदी (समस्त प्रतियोगीपरिक्षाओं के लिए) उपेंद्रनाथ अश्क के एकाकियों में पात्र योजना ‘खामोशी’, ‘मीनू’,’मृत्यु के पश्चात’, ‘भूख’, ‘लड़ाई जारी रहेगी’ (प्रहसन) प्यार की मंजिलें (कविता संग्रह)अंतिम दशक के हिंदी नाटकों में यथार्थवादी चेतना 21 वीं सदी में तुलनात्मक साहित्यका महत्त्व (संपादित) सूरा (तेलुगु उपन्यास का हिंदी अनुवाद) (अनूदित) विमुक्ता (तेलुगुकहानी संग्रह का हिंदी अनुवाद) (अनूदित) सम्मान / पुरस्कार : भारतीय संस्कृति निर्माणपरिषद्, हैदराबाद द्वारा शिक्षा शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित; एवं तेलुगु से हिंदीमें अनूदित ‘विमुक्ता’ कहानी संग्रह के लिए श्री कोम्मु शिव शंकर रेड्डी स्मारक अनुवादपुरस्कार प्राप्त।




